कबीर जयंती : धर्म नगरी नादिया में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया कबीर जयंती , विशाल भण्डारे का हुआ आयोजन

डोंगरगांव – प्राचीन कबीर मठ धाम धर्मनगर नादिया में प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी सदगुरु कबीर साहेब की जयंती, चौदस पूर्णिमा के पावन अवसर पर नादवंशाचार्य पंथ श्री हुजूर स्वामी मंगल साहेब के पावन सानिध्य में मनाई गई।

ट्रस्ट के सचिव ब्रह्मचारी संत गिरवर दास ने बताया कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भक्तजन व ग्रामवासी सम्मिलित हुए। प्रातः धूमधाम से शोभा रैली के पश्चात सत्संग प्रवचन का लाभ सभी हंसजनों को मिला। आचार्य श्री ने मन के विषय में बताया कि यह मन सब के भीतर समाया हुआ है और इंसान के सभी सुख और दुख का कारण भी है। इसलिए कबीर साहेब ने मन की साधना पर विशेष जोर दिया है।

धर्माधिकारी श्री सत्येंद्र साहेब ने कहा कि जब कबीर साहेब इस दुनिया में थे तब समाज में अस्पृश्यता, ऊंच-नीच का भाव, पाखंडवाद, धार्मिक कट्टरता व हिंसा रुपी विभिन्न बुराइयां व्याप्त थी। कबीर साहेब अपने ज्ञान के माध्यम से इन्हीं बुराइयों को मिटाने का प्रयास करते हुए बताए- “तहिया हम तुम एकै लोहू, एकै प्राण व्यापै मोहु।” एक ही प्रकार के संघटक तत्वों से सबका शरीर बना हुआ है। अतः इस दुनिया में कोई भी इंसान बड़ा या छोटा नहीं है, बल्कि सब बराबर है। अपने-अपने धर्म को श्रेष्ठ बताकर लड़ने वाले लोगों के लिए सद्गुरु ने कहा है- “भाई रे दोई जगदीश कहां से आया, कहु कौने बौराया। अल्लाह राम करीमा केशव, हरि हजरत नाम धराया।।”


ट्रस्ट समिति व समस्त ग्रामवासी नादिया के सहयोग से विशाल भोजन भंडारा का आयोजन भी संध्या बेला पर हुआ।

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